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Friday, May 25, 2018

Whatsapp Message: 25th May

हरिओम,

लीगल टीम के द्वारा किस तरह केस को बिगाड़ा गया और बिगाड़ा जा रहा है.

इतनी बड़ी संस्था की लीगल टीम में एक भी वकील नहीं. इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है? यह अनपढ़ गवर लोग, लीगल टीम में ऐसे सेवा कर रहे है जैसे शरबत वितरण करना हो YSS की टीम की तरह या भंडारा करना हो निक्कम्मी समिति की तरह.

आज इनकी line of working style पे थोड़ी बाते करूँगा.
१) यह अहंकारी, ना समझ, मुर्ख, निक्कम्मे लीगल टीम वाले पहले तो ऐसे वकील को चुनेंगे जो इनकी हर बात मान जाये, जब जब यह बुलाये तब तब जोधपुर आ जाये और जैसी एप्लीकेशन बताई जाये वैसी एप्लीकेशन ही लगाए, नहीं तो उन्हें साइड करदेंगे.
लड़ा जी, संजीव जी, वीरेंदर जी, हर्षद पोंडा, स्वामी जी, जैसे अच्छे वकील को इसीलिए साइड किया गया है क्यूंकि यह सब आश्रम की लीगल टीम के इशारो पे नहीं नाचते.
२) यह अहंकारी, ना समझ, मुर्ख, निक्कम्मे लीगल टीम वाले एक वकील से एक strategy पर एप्लीकेशन लगाने के बहाने ड्राफ्ट बनवाएंगे और दूसरी तरफ दूसरे वकील से दूसरी strategy पर एप्लीकेशन लगाने के लिए दूसरा ड्राफ्ट बनवाएंगे. इस प्रकार २-३ स्ट्रेटेजी, २-३ वकीलों से मिल जाने पर यह अहंकारी, ना समझ, निक्कम्मे लीगल टीम वाले खुद decide करेंगे की कौन सी एप्लीकेशन लगाना है. लीगल का ज्ञान है नहीं और निरयण लेने चले.
लड़ा जी, संजीव जी, वीरेंदर जी, हर्षद पोंडा, स्वामी जी, जैसे अच्छे वकील इसीलिए परेशान है क्यूंकि इनको काम करने नहीं दिया जाता जोधपुर में. बल्कि इनको मजबूर किया जाता है की यह अच्छे वकील पहले अपने मुर्ख लोगो तो लीगल की बाते समझाए और इन मूर्खो को confidence में ले. कोई भी अच्छा और बड़ा वकील कब तक यह सेहता रहेगा?
३) यह अहंकारी, ना समझ, मुर्ख, निक्कम्मे लीगल टीम बड़े बड़े वकीलों को अपने इशारो में नचाते थे और नचाते है.
इसीलिए लड़ा जी, संजीव जी, वीरेंदर जी, हर्षद पोंडा, स्वामी जी जैसे अच्छे वकील आश्रम की लीगल टीम को पसंद नहीं करते.
४) यह अहंकारी, ना समझ, मुर्ख, निक्कम्मे लीगल टीम वाले, चाहे करोड़ो रूपए आश्रम के खर्च हो जाये पर यह वही वकील को लाएंगे जो इनके इशारे पे नाचे.
संजीव जी, वीरेंदर जी, स्वामी जी जैसे वकील तो पैसा भी नहीं लेते. लड़ा जी भी शायद फ्री में ही आते होंगे.

होना यह चाहिए की अच्छे वकील को सीधा बापूजी से संपर्क करा के जोधपुर में केस लड़ने की लिए free hand दिया जाना चाहिए. अब चाहे वो लड़ा जी हो या संजीव जी या वीरेंदर जी या हरसद पोंडा या स्वामी जी.

ऐसा नहीं हो रहा है इसीलिए में बार बार कहता हु की यह अहंकारी, ना समझ, मुर्ख, निक्कम्मे लीगल टीम के कारण ही केस ख़राब हुआ है और बापूजी को आजीवन कारावास हुआ है. अभी भी कुछ ऐसा ही होते दिख रहा है.

इस प्रकार की और भी बाते है जो आने वाले दिनों में शेयर करूँगा.

यह अहंकारी, ना समझ, मुर्ख, निक्कम्मे लीगल टीम वाले बोले तो नीता, आश्विन बुड्ढा, पुनीत, अर्जुन, अजय शाह, मेजर, विकास खेमका, निशांत, के डी पटेल एवं अन्य.

http://athishravikanth.blogspot.in/

हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
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Wednesday, May 23, 2018

Whatsapp Message: 23rd May

हरिओम,

नासिक आश्रम के सम्भन्ध में!

अगर हमारे घर का या हमारे अपनी जमीन का 1 SQFT भी हमसे चला जाता तो उसको बचने के लिए हम १० हाथी का बल लगा देते. कोर्ट केस कर देते या और कोई बल से जमीन को हाथ से जाने नहीं देते. जब यह जमीन हमारी खुद की होती है और अपने पैसे से खरीदी हुई होती है तो रातो की नींद उड़ जाती और दिन का चैन. जमीन के मामले में तो कईयों को दिल का दौरा भी पड चूका है.

ऐसे में जब नासिक आश्रम को तोडा जा रहा था तो कुछ अहमदाबाद आश्रम के संचालको के चमचो द्वारा इस बात का प्रचार किया जा रहा था की
"जमीन अवैध थी"
"कई बार नोटिस भी आ चूका था इस जमीन के खिलाफ"
"यह जमीन तो आज नहीं तो कल जानी ही थी." आदि आदि

इतने में मन भरा नहीं चमचो का तो तात्विक सत्संग द्वारा इस भारी नुक्सान को एक लीला का रूप देना शुर कर दिया गया, जैसे:
"बापूजी का वचन था की यह ashram नहीं रहेगा, टूट जायेगा"
"बापूजी का वचन है की यह एक बड़ा सेंटर बनेगा भविष्य में"
"बापूजी की यह सब लीला है और यह सब होना ही था तो इसमें चिंता होने की जरुरत नहीं है" आदि आदि

मेरा सवाल यह है की:
जब जमीन अवैध थी तो इस्पे अतिक्रमण किया ही क्यों गया?

आश्रम का कुछ भी construction का काम होता है तो स्थानीय समिति, स्थानीय आश्रम संचालक और अहमदाबाद मैनेजमेंट का हाथ होता है. जब बापूजी ने पहले ही कह दिए थे की यहाँ आश्रम टूटेगा और आज्ञा नहीं दी तो फिर समिति, स्थानीय आश्रम संचालक और अहमदाबाद मनमेजेंट ने अतिक्रमण किये ही क्यों? क्या इससे यह सिद्ध नहीं होता है की पहले से ही अहमदाबाद मैनेजमेंट, स्थानीय संचालक और समिति अपनी मर्ज़ी से काम कर रहे है और इसे बापूजी की आज्ञा और सेवा का रूप देके सभी को ब्रह्मित कर रहे है जैसे अभी कर रहे है?

या तो अहमदाबाद मैनेजमेंट और स्थानीय संचालक सभी गुरु परिवार को यह स्पष्ट करे की इस construction की आज्ञा पूज्य गुरुदेव ने ही दी थी.

२०१३ के पहले संस्था का दबदबा था. कई political पार्टी हमारे पक्ष में भी थी. जब १५ साल पहले आश्रम मैनेजमेंट को पता चल गया था की यह जमीन अवैध है तो फिर इसको legally ठीक क्यों नहीं किया गया? क्या इस जमीन को आश्रम की लीगल टीम और मैनेजमेंट की नाकामी समझी जाए?

अहमदाबाद आश्रम मैनेजमेंट, स्थानीय संचालक, स्थानीय समिति एवं अहमदाबाद लीगल टीम द्वारा सभी साधको को यह बताया जाये की और कितने आश्रम की जमीन अवैध है और आज नहीं तो आने वाले समय में टूटने वाली है?

साधक परिवार का हक़ बनता है की इस सम्बन्ध में सबको जानकारी हो और इच्छुक साधक लीगली कुछ सकारात्मक निर्णय ले सके क्यूंकि स्थानीय समिति, स्थानीय आश्रम संचालक, अहमदाबाद मैनेजमेंट और लीगल टीम को यह एक लीला ही लग रही है.

सभी गुरु भाई और बहनो से बिनती करता हु की नजदीक के आश्रमों में जाए और संचालको से आश्रम की जमीन का पेपर ले और अच्छे वकीलों से दिखाके उसे ठीक करे.

कुछ भी लीगल सलाह चाहिए तो सनातन संस्था के वकीलों से सलाह लेके आप को दिया जायेगा.

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हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
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Friday, May 18, 2018

Whatsapp message: May 18

हरिओम,

पूज्य गुरुदेव को बहार लाने के लिए प्रयास करे या तो बिना गुरुदेव के जीने के अभ्यास करे बात कड़वी है पर सच्ची है.
कुछ कड़वी सचाई जो आज सबके साथ शेयर करना चाहूंगा.

हमारे पूज्य गुरुदेव के शरीर की उम्र ८० से ज्यादा हो चुकी है. आज कल का हवामान और खाने में मिलाया गया केमिकल के अनुसार इस कलयुग के हिसाब से पूज्य गुरुदेव का शरीर और ५-१५ साल मन लीजिये. परन्तु जिस प्रकार जेल का वातावरण और खानपान है, उसके हिसाब से ज्यादा कहना ठीक नहीं है.

जिस तरीके से केस चल रहा है, उसके हिसाब से अगले ५ साल तक भी बापूजी हमारे बिच नहीं आएंगे. अगर आज की तारिक मई १८ २०१८ से भी अच्छे वकील केस सँभालते है तो भी काम से कम १८-३० महीना लगेगा कुछ पॉजिटिव रिजल्ट आने में. नहीं तो जिस हिसाब से अपने जोधपुर की लीगल टीम केस को आगे बड़ा रही है, उस हिसाब से तो हमे हमारे पूज्य गुरुदेव को भूल ही जाना चाहिए. ध्यान रहे लीगल टीम के साथ पूरा का पूरा अहमदाबाद आश्रम का मैनेजमेंट भी साथ है. इन सब के मन में बस एक ही इच्छा है की कैसे भी करके हमारे गुरजी अंदर ही रहे और हम हमारी गद्दी संभल ले या तो आश्रम बेच के अपनी जिंदगी सेट करले.

पूज्य गुरुदेव को आजीवन कारावास का पूरा प्लान हो चूका है. ३-४ साल में अगर पूज्य गुरुदेव को जोधपुर जेल से रहत मिलती भी है तो अहमदाबाद का केस त्यार खड़ा है. जब जोधपुर का केस ८-१० साल चल सकता है तो अहमदाबाद केस कितने साल चल सकता है? इस का आप खुद अंदाजा लागले क्यूंकि आप समझदार है. इसका सीधा मतलब एहि है की हमारे पूज्य गुरुदेव के शरीर को शांत होने तक यह जोधपुर लीगल टीम और अहमदाबाद के मैनेजमेंट वाले लीगल, कोर्ट और कचेरी के चक्कर में सब ख़तम कर देंगे.

मेरा सवाल आप सब से यह है की
बिना सदगुरुदेव के वक्ताओं के वक्तत्व का क्या महत्व ?
बिना सदगुरुदेव के आश्रमों का क्या करेंगे ?
बिना सदगुरुदेव के आश्रम के प्रोडक्ट का क्या महत्व ?
बिना सदगुरुदेव के क्या मिल जायेगा संचालको के चाटुकार बनके?
बिना सदगुरुदेव के क्या करेंगे हम सब.?
बिना सदगुरुदेव के कौन उठाएगा हमे ऊपर ?
बिना सदगुरुदेव के क्या करेंगे जोधपुर लीगल टीम की भक्ति का?
बिना सदगुरुदेव के क्या करेंगे ऋषि प्रसाद सेवा का ?

इतिहास गवाह है की ब्रह्मज्ञानी को जेल में रखके ज़हर दे कर मर दिया गया, इतिहास गवाह है की सत्ता के लोगो ने स्वार्थी और निक्कमे शिष्यों का सहारा लेके महापुरुषों को जेल में ही महापुरुषों का शरीर शांत करा दिया गया.

दुःख और डर के साथ कहना पढ़ रहा है की वही इतिहास दुबारा दोहराया जा रहा है.

सभी का focus पूज्य गुरुदेव से हटा के वक्ताओं के प्रोग्राम पे लगाया जा रहा है,
सभी का focus पूज्य गुरुदेव से हटा के दूसरे प्रोग्राम पे लगाया जा रहा है,
सभी का focus पूज्य गुरुदेव से हटा के शरबत वितरण और भंडारा जैसे सेवा पे लगाया जा रहा है

बिना सदगुरुदेव के क्या महतत्व इन सब का?

पूज्य बापूजी को जेल से जितना जल्दी बहार ला सकें, उतना हमारे लिए अच्छा है. नहीं तो गुरूजी तो ज्ञानी है, उन्हें शिष्यों से मोह नहीं परन्तु हम तो बापूजी से है और हमे बापूजी की ही जरुरत है. हमारी आध्यात्मिक स्थिति भी डॉ.प्रेम जी तरह नहीं है की हम गुरूजी को खोने के बाद भी अध्यतम मस्ती में दुबे रहे. बापूजी के अलावा और कोई गुरु का स्थान नहीं ले सकता हमारे जीवन में.

इसीलिए कह रहा हु की बिना गुरुदेव के जीने का अभ्यास करलो या गुरुदेव को बहार लेन के लिए कुछ करलो. बिच का रास्ता कुछ नहीं है.

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हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
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Thursday, May 17, 2018

Whatsapp Message: 17th May

हरिओम,

"अच्छे और सच्चे आश्रमवासिओ को आज नहीं तो कल आश्रम छोड़के घर जाना ही पड़ेगा |"

अच्छे आश्रमवासिओ की संख्या बहुत है पर डर से, गलत के खिलाफ, यह अपनी आवाज़ नहीं उठाते. अगर एक भी बार, हलकी सी भी आवाज़ उठाई तो तुरंत बापूजी से आज्ञा दिलवा देंगे और घर भेज देंगे. मेरी इस बात से पुराने आश्रमवासी और सच्चे साधक सहमत होंगे |

पर अच्छे और सच्चे आश्रमवासी को यह नहीं पता की आज नहीं तो कल उनको निकाल ही देंगे और घर जाना ही पड़ेगा ,कारण यह है की जो गद्दार संचालक है अहमदाबाद में और दूसरे जगह, जो आश्रम को हड़पने में लगे हुए है, वे नहीं चाहेंगे की अच्छे और सच्चे आश्रमवासी साथ में रहे नहीं तो इनकी पोल खुल जाएगी |

वैसे भी धीरे धीरे अच्छे और सच्चे आश्वमवासी एक एक करके घर जा ही रहे है और जो नहीं गए वो दब दब के रह रहे है , समझदारी इसी में है की अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाये और जो आश्रम की प्रॉपर्टी और पैसा हड़पने में लगे है उनके खिलाफ लीगली कुछ करवाई करे. यही सच्चे शिष्य का कर्तव्य है |

कुछ गद्दार आश्रमवासिओ के लक्षण और लक्ष्य निचे दे रहा हु-
लक्ष्य
कुछ गद्दार संचालक अहमदाबाद के और इनके कुछ चमचे जो अलग अलग आश्रम में है. यह सब, जब तक इनको अपना अपना हिस्सा नहीं मिलेगा, तब तक यह आश्रम नहीं छोड़ेंगे |

इन सब को पता है की आश्रम की प्रॉपर्टी करोड़ो में है , अगर यह नहीं खाएंगे तो दूसरा गद्दार खा लेगा |
आत्मज्ञान और साक्षात्कार आदि , तो बस रट्टा मार लिया है, दूसरो को उपदेश दे और अपने आप को सबकी नजरों में ऊंचा साधक कहलाये, पीठ पीछे तो पैसा, प्रॉपर्टी और बिज़नेस आदि जोड़ लिया और कईयो ने तो शादी आदि कर अपनी लाइफ को सेटेल मान रहे है |

बहुत सारे आश्रमवासी ने अपना बिज़नेस शुरू कर लिए है और कई शुरू करने में लगे है- (जैसे उदय संघानी, वैसे लिस्ट बहुत है)
बहुत सारे शादी कर लिए है और कई सेटिंग ज़माने में लगे है |
बहुतो ने अपना काम बना लिए है और आश्रम छोड़ दिए है (जैसे मनोज बेले, वैसे लिस्ट बहुत है) और कई अपना काम बनाने में लगे है |

लक्षण
१) यह कुछ गद्दार संचालक है अहमदाबाद में जिनके पास ट्रस्ट पे काफी कण्ट्रोल है और पैसा भी इनके कण्ट्रोल में बहुत है आश्रम का.(जैसे वाणी, अर्जुन, चार नंबर वाला कामी, वैसे लिस्ट बहुत है )
२) इन्ही के चमचे और सहभागी कई दूसरे आश्रम में भी है जो काफी आश्रम की प्रॉपर्टी, पैसा और ट्रस्ट कण्ट्रोल में किये हुए है (जैसे शोभाराम, वैसे लिस्ट बहुत है.)
३) और कुछ चमचे ऐसे है जिनके पास कोई कण्ट्रोल नहीं है और कोई पैसा भी नहीं है, वो गद्दार संचालक के तलवे चाटते रहते है और इनके propaganda पे काम करते रहते है. ऐसे चमचे, जिनके पास कुछ कण्ट्रोल नहीं है, वो इसी उम्मीद पे आश्रम में ठीके हुए है की, जब बंटवारा होगा तो हमे भी कुछ पैसे मिलेंगे ताकि हम भी शादी करले और बिज़नेस शुरू करके सेट हो जाये. (जैसे राजू चिल्लर, बैंगलोर का रवि, वैसे लिस्ट बहुत है)

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हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
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Tuesday, May 15, 2018

Whatsapp Message: 15th May

हरिओम,

वक्ताओं का वक्तत्व बड़ा
या
पूज्य गुरुदेव का सत्संग?

लीगल टीम और आश्रम मैनेजमेंट की नाकामी के बाद, पूज्य गुरुदेव को उम्र कैद की सजा सुनाने के बाद, साधको को पुनः ब्रह्मित करने के लिए आश्रम से वक्ताओं को दुबारा जगह जगह भेजा जा रहा है.

यह वक्त अपने आपको बहुत ही ज्ञानी समझते है. समिति के पैसे से कार और फ्लाइट में घूमते रहते है. ऊपर से दक्षिणा भी लेते है.

एक तरफ गुरूजी ने सिखाया है कि अन्याय सहना दुगना पाप है एवं अन्याय के खिलाफ लड़ना चाहिए।

गुरूजी ने हमें यह भी सिखाया है की हम साधको को बहादुर की तरह कदम अपना आगे बढ़ाते चलना है।

वही दूसरी तरफ यह महाज्ञानी कहलाने वाले वक्ता, जगह जगह जाके साधकों को भ्रमित करते है और शांति का पाठ सिखाते है। इन वक्ताओं के हिसाब से सभी को सिर्फ जप और कीर्तन ही करना है। बाकी जोधपुर केस को और बापूजी को भूल जाये

ये वक्ता निक्कमा रहने का पाठ पढ़ाते हैं जगह जगह जाकर

आखरी में आश्रम की प्रॉपर्टी को एहि लोग आपस में बटवारा कर लेंगे.

कुछ निकम्मी समिति भी इस षड्यंत्र में सहभागी है. एहि समिति इन वक्ताओं के ऊपर पैसा खर्च करती है.

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हरिओम।
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Monday, May 7, 2018

WhatsApp Messages: 7th May

हरिओम

आश्चर्य और दुर्भाग्य की बात यह है की अभी तक ना ही जोधपुर लीगल टीम से, ना ही अहमदाबाद लीगल टीम से और न ही अहमदाबाद मैनेजमेंट की तरफ से जोधपुर केस की हार की जिम्मेदारी ली गयी.

responsible वही होता है जो हार की जिम्मेदारी ले सके. लीडर वही होता है जो सबको कॉन्फिडेंस में लेके चले.

मक्कार और बेईमान लोग ही हार की जिम्मेदारी नहीं लेते है. जीत होती तो पहले श्रेय ले लेते. अहमदाबाद की लीगल टीम जोधपुर की टीम के ऊपर कोसेगी और जोधपुर की टीम अपना काला मू छुपा के गायब हो गए है.

अहमदाबाद मैनेजमेंट जिम्मेदारी का काम छोड़के व्हाट्सप्प messages को clarification देने में लगी हुई है. कितना समाया है इनके पास.

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हरिओम
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Wednesday, May 2, 2018

Whatsapp messages: 2nd May

हरिओम,
अपनों ने दिया धोका!

इतिहास गवाह है. जब जब अपनों ने दिया धोका तब तब अनर्थ हुआ है. कुछ उद्धरण देता हु निचे आप सभी को.

१)
a) जहा जहा सुरेश चावनके जी जाते थे वहां अपने साधक जाके मिलते थे और फोटो खिचवाते थे. इन्होने ही कई बार ट्विटर के माध्यम से आश्रम के गद्दारो के बारे में बोले है.
b) जहा जहा सुब्रमनियन स्वामी जी जाते थे वहां वहां अपने साधक जाके मिलते थे और सपोर्ट की मांग करते थे. इन्होने ही कई बार ट्विटर के माध्यम से आश्रम के गद्दारो के बारे में बोले है.
c) हाल ही में K K manen भी मीडिया में बोल चुके है की आश्रम लीगल टीम की गलती थी करके.

क्या कोई भी साधक इन सभी के पास जाके डिटेल में जानकारी लेने की कोशिश की?
क्या कोई भी साधक इन सभी के पास जाके यह जानने की कोशिश करे क्या की यह गद्दारो के बारे में क्यों बोले है और ऐसा क्या हुआ इनके साथ या ऐसा क्या पता चला इनको जिससे इनको कन्फर्म हो गया की आश्रम के अंदर गद्दार है?

यह सब जाने बिना अहमदाबाद आश्रम मैनेजमेंट और लीगल टीम की भक्ति करना सही है क्या? क्या बापूजी से बड़े, यह लोग हो गए क्या?
२)
a) लड्डा जी जैसे इतने अच्छे और वरिष्ठ वकील को किस कारणों से केस से दूर जाना पड़ा?
b) संजीव पुनाळेकर जी जैसे इतने अच्छे वरिष्ठ वकील को किस कारणों से केस से दूर जाना पड़ा?
c) स्वामी जी जैसे इतने महान वकील को किस कारणों से केस से पहले दूर किया गया?

क्या कोई भी साधक इन सभी के पास जाके डिटेल में जानकारी लेने की कोशिश की?
क्या कोई भी साधक इन सभी के पास जाके पूछने की कोशिश करे की यह केस से क्यों हैट गए?

३) में गलत हो सकता हु पर क्या यह सब लोग भी गलत है?

अंदर के धोखेबाजो से ज्यादा नुक्सान होता है. उद्धरण है
१) मीर ज़फर
२) मोहम्मद अली जिन्नाह
३) जयचन्द
४) जय गोपाल (इसके कारन भगत सिंह को फ़ासी हुई)
५) राजा मन सिंहग
६) राजू चांडक (पूर्व आश्रमवासी)
७) अमृत प्रजापति (पूर्व आश्रमवासी)

जिस केस में कोई दम नहीं, उस केस में बापूजी को उम्र कैद की सजा दिलवादी. सर्कार, मीडिया, ईसाई मिशनरीज तो पता था पर *हमे तो अपनों ने धोका दिया*

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हरिओम।
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2)

हरिओम,

when we were informing everyone that chances for Bapuji arrest is high and need to do something seriously on ground
but sadhak and everyone told that it is not possible

when we were informing everyone including ashramwasi that we should fight legally to provide food to Bapuji
sadhak and everyone told that it is not possible

when our team, rahul joshi team and kunal team were informing everyone that the way case is conducting, chances of conviction is high
sadhak and everyone told that it is not possible

now we, Subramanian swamy, suresh chavanke are telling that insider played a major role in Bapuji conviction
sadhak and everyone telling that it is not possible

now we are also informing that in coming days few ashram we may loose
sadhak and everyone telling that it is not possible

now we are also informing that next target is Bharti didi,
sadhak and everyone telling that it is not possible

there are more severe damage to come in coming days
but unfortunately sadhak are living in some dilemma that still everything is fine despite Bapuji was convicted for umr kaid

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हरिओम
आतीश रविकांत, बंगलौर
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3) 
हरिओम,

अभी तक मैंने गद्दार अहमदाबाद में बैठे कुछ आश्रमवासिओ के बारे में बताया था. अभी कुछ साधको के बारे में बताता हु.

९०% साधक वो है जो घर बैठे संकल्प से, ट्विटर से, जप से चाँद को जमीन में लाना चाहते है, बापूजी को जेल से बहार लाना चाहते है, और दुश्मनो के छक्के उड़ाना चाहते है. उस युग में भगीरथ ऋषि भी संकल्प से गंगा जी को धरती पे नहीं ला सके. 

खेर, ऐसे साधको के पास सेवा के लिए सिर्फ सुबह का कुछ समय और शाम का कुछ समय ही होता है और अगर पुरे दिन की बात करे तो यह ज्यादा से ज्यादा शनिवार और रविवार ही दे सकते है वो भी हर weekend नहीं. इस ९०% साधक में कुछ ऐसे भी है जो समझदार भी है और प्रक्टिकली समझते भी है पर परिवार और ऑफिस की मज़बूरी के कारण कुछ नहीं कर पाते.

बाकी दिन में चाहे आश्रम को बम से उडा भी दिया जाये तो भी यह शनिवार या रविवार को मीटिंग करके अगले हफ्ते की शनिवार और रविवार को अहमदाबाद आश्रम से कुछ निर्देश मिले तो कुछ करेंगे नहीं तो आसारामायण का पाठ करके, महा प्रसादी ग्रहण करके बीवी बच्चों का प्रेशर सँभालने वापस घर चले जायेंगे.

हक़ीक़त में ऐसे साधको को बापूजी के केस और आश्रम से कुछ लेना देना भी नहीं होता है. अंदर और पीछे आग भी नहीं लगी होती है. यह इसी फ़िराक में बैठे रहते है की काश बापूजी या अहमदाबाद से यह सन्देश आ जाये की शांति बनाके के रखे. जिस समय यह मैसेज आ जाता है तब अंदर ही अंदर यह बहुत ही ज्यादा आनंद का अनुभव करते है. इसी को आज्ञा मानकर दुसरो को भी शांति और तत्वज्ञान देने लग जाते है और व्हाट्सप्प में यह मैसेज स्प्रेड करना इनका परम कर्त्तव्य बन जाता है.

अहमदाबाद के जो गद्दार संचालक है वो भी माहौल को शांत करने के लिए और गुमराह करने के लिए ऐसे ही साधको और समिति वालो का सहारा लेते है. इसी कारण ऐसे साधको का और कुछ गद्दार संचालको की जोड़ी खूब बनती है.

बाकी के १०% साधक जो कुछ थोड़ा प्रैक्टिकल सोच के करने के इक्छुक होते है उन्हें चारो तरफ से प्रेशर लगाके दबा दिया जाता रहा है. 

रही बात समिति की, तो ज्यादा से ज्यादा समिति भी यही चाहती है की कुछ न करे. जितना हो सके उतना कम ही करे वो भी दिखावे के लिए ताकि कोई हमारे ऊपर ऊँगली ना उठा सके की हमने कुछ किया नहीं. समिति के लोग कभी पियाओ के कार्यक्रम कर लेंगे, कभी किसी वकता के सत्संग करके पैसा बर्बाद करलेंगे, कभी महा भंडारा के आयोजन कर लेंगे, १५ अगस्त को रैली निकलवा लेंगे, कभी कभी आश्रम में जाके हिसाब किताब कर लेंगे तो कभी मिलके चर्चा (जिसका कोई सार नहीं निकला अभी तक) कर लेंगे. इस प्रकार की समिति के साथ भी यह ९०% साधक ही साथ देते है और इस प्रकार के साधको की समिति के साथ खूब बनती है.

हम ४ करोड होके मीडिया पे प्रेशर नहीं बना सके
हम ४ करोड होके पोलिटिकल प्रेशर नहीं बना सके
हम ४ करोड होके कुछ भी नहीं कर सके जिससे केस में कुछ पॉजिटिव असर हो सके 

कारण यह ९०% साधक, समिति और अहमदाबाद के कुछ गद्दार संचालक ही है.

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हरिओम।
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