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Tuesday, September 11, 2018

Whatsapp Message: 11th September

हरिओम,

अहमदाबाद संचालक उदय संघानी जी को शादी की बधाई हो!

सुनने में आ रहा है की अहमदाबाद आश्रम के संचालक उदय संघानी जी की शादी हो चुकी है. मेरे पास एक फोटो भी है जिसमे उदय संघानी जी अपनी धर्म पत्नी के साथ खड़े है.

फोटो की लिंक निचे दे रहा हु.
https://bit.ly/2CEWPua

अगर यह information गलत है तो उदय भाई से निवेदन है की clarification दे दीजिये और में यह लिंक अपने ब्लॉग से हटा दूंगा. अगर सही है तो उदय भाई को खूब खूब बधाई हो शादी की.

उदय भाई से पर्सनल व्हाट्सप्प पे confirmation पूछा था पर कोई response ना आने पर ब्लॉग के माध्यम से यह information शेयर कर रहा हु.

http://athishravikanth.blogspot.in/

हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
केवल व्हाट्सप्प: +91 9663978686
Email: athishravikanth@gmail.com

Friday, August 31, 2018

Whatsapp Message: 31st August

हरिओम,

ब्लैक डे! ३१ अगस्त २०१८

देखा जाये तो यह ब्लैक डे या शोक दिवस आश्रम मैनेजमेंट की तरफ से होना चाहिए था. इस ब्लैक दिवस में जगह जगह कानूनी तरीके से शांतिपूर्ण विरोध करना चाहिए था सर्कार के खिलाफ.

परन्तु आश्रम मैनेजमेंट की मज़बूरी यह है की वह विरोध करे तो किसका करे?
बी.जे.पी के साथ मिलके तो आश्रम के कुछ गद्दार संचालक बापूजी को बहार निकलने नहीं दे रहे है और आश्रम हड़पने की तयारी चालू है.
कांग्रेस सत्ता में है नहीं तो उसका विरोध कर नहीं सकते.
क्रिस्चियन मिशनरीज और एन.जी.ओ का सीधा कनेक्शन है नहीं केस में.

इसीलिए हर साल ३१ अगस्त के दिन आश्रम मैनेजमेंट को सांप सुंग जाता है.

रही बात साधक की तो, साधक सिर्फ Whatsapp और Facebook में profile image change करके और कुछ message forward करके यह  समझते है की बहुत बड़ी सेवा कर ली.

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हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
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Saturday, August 25, 2018

Whatsapp Message: 25th Aug

हरिओम,                                                                                              Publish Date: 25th August 2018

साधक सम्मलेन कार्येक्रम! आइये जानते है इस क्रायक्रम के बारे में.

इस क्रायक्रम में आपको वर्तमान बापूजी के केस के बारे, आश्रम की स्थिति एवं परिस्थिति और कुछ करने योग्य सेवाओं की जानकारी दी जायेगी
यह कार्यक्रम one-on-one, face-to-face, open discussion होने के कारण आप सवाल जवाब भी कर सकते है सभय तरीके से

साधक सम्मलेन कार्यक्रम, बदलापुर आश्रम में २ सितम्बर २०१८ को सुबह ठीक १० बजे शुरू हो जायेगा. 

इस क्रायक्रम की आवश्यकता क्यों पड़ी?
पिछले ५ साल में एक भी बार आश्रम मैनेजमेंट की तरफ से साधक को एकजुट करके one-on-one, face-to-face open discussion के लिए नहीं बुलाया गया. सन २०१३ से विपरीत परिस्थिति होने के कारण विपरीत तरीके से सेवा करने की जरुरत थी.

दुर्भाग्यवाश, अहंकारवाश, मूर्खता के कारण, न ही आश्रम मैनेजमेंट साधको को एकजुट करपाए और ना ही विपरीत समय के अनुसार साधको को एकजुट करके कोई विपरीत सेवा शुरू कर पाए.

परिणाम यह हुआ की अधिकतर आश्रमवासी को ही केस के बारे में कुछ नहीं पता रहता है और क्या करना है, यह भी पता नहीं रहता है. तो आम साधक तो दूर की बात है.

ऐसे में, वर्तमान परिस्थिति को समझते हुए कुछ समझदार YSS के युवाओ ने (शरबत वितरण, ट्विटर और भंडारे वाले युवा नहीं) साधको को एकजुट करने की सेवा शुरू की है जिसमे साधको को current case की position की जानकारी दी जाती है और विपरीत समय के अनुसार कुछ सेवाओं की चर्चा करके सेवा कार्ये शुरू किये जाते है.

पहला प्रोग्राम जोधपुर में बापूजी की कृपा से संपन्न हुआ जिसका नाम था संकल्प सभा फिर दिल्ली में भी सफलता पूर्वक किया गया. अभी मुंबई के YSS के युवाओ ने साधक सम्मलेन कार्यक्रम के नाम से बदलापुर आश्रम में, इस सभा का आयोजन कर रहे है. इस कार्यक्रम में राहुल जोशी भाई, रवि भाई (नागपुर), अविनाश भाई, सचिन वाघेला भाई एवं कई साझदार एवं active युवा भाग लेंगे.

इस कार्यक्रम में आश्रम मैनेजमेंट को भी आने की request की जाती है. अगर न आ पाए तो किसी प्रतिनिधि को भी भेज सकते है. आश्रम मैनेजमेंट या उनके प्रतिनिधि से करीब २ घंटे सवाल जवाब और चर्चा का सत्र होगा. तीखे, कड़वे और merit में सवाल पूछे जाने पर तात्विक सत्संग और भावनात्मक उत्तर को value नहीं दिया जायेगा. आश्रमवासी की इज्जत करते है इसीलिए disclaimer दे रहे है.

इस प्रकार के साधको को आना सख्त मन है जो
१) जिसके पास हर दिन मात्र ३ घंटा भी सेवा के लिए नहीं है
२) रोज नियम न करने वाले
३) ६ महीने या एक साल में बापूजी को जेल से बहार लाने की इक्छा रखने वाले
४) ट्विटर या शरबत वितरण से सर्कार को हिलने और गिराने की सोच रखने वाले

अगर आप ऊपर की category में आते है तो आपसे हाथ जोड़ के प्राथना है की आप इस क्रायक्रम में आके अपना और हमारा दिन एवं समय ख़राब ना करे. घर में ही रहके संकल्प और जप बड़ा दे.

समय और location के लिए निचे दिए नंबर पर संपर्क करे.
+91 83290 87409
+91 95947 76801
+91 79770 66051

http://athishravikanth.blogspot.in/

हरिओम।

Saturday, August 4, 2018

Whatsapp Message: 4th Aug

हरिओम,

ऋषि प्रसाद में राहुल जोशी का नाम उल्लेख करने का कारण जानने की कोशिश करते है!

ऋषि प्रसाद पत्रिका का स्तर बहुत ऊँचा था और है, रहेगा की नहीं, पता नहीं.  ऋषि प्रसाद की सेवा करने वाले सौभाग्यशाली साधको को पता होगा की ऋषि प्रसाद के मेंबर ज्यादातर वे है जो साधक नहीं है.

ऋषि प्रसाद पत्रिका के माध्यम से बहुत non -sadhak को नाना प्रकार के लाभ हुए है और इसी कारण वे पूज्य बापूजी से भी जुड़े है.

अगर कुछ issue को प्रकाशित ही करना था तो national issue ले लेते jaise मोदी के खिलाफ, सीताराम येचुरी के खिलाफ, ईसाई पॉप के खिलाफ या और भी कुछ national level के issues.

राहुल भाई, आप, में और हम सब की तरह एक साधक है और उनके मन में भी पीड़ा है और जोश भी है कुछ करने के लिए. अगर राहुल भाई का तरीका पसंद नहीं आया तो इनसे हाल ही में हुई संकल्प सभा में चर्चा कर लेना था. राहुल भाई ने कभी national issue नहीं उठाया है. हमेशा internal issue उठाया है. Internal issues को national level की पत्रिका में छपने के पीछे आश्रम के गद्दार संचालको की घबराहट और immaturity दिख रही है.

राहुल सिर्फ मुद्दे के बातो पे सवाल ही तो पूछते है, कोई murder तो नहीं कर रहे है और जवाब न मिलने पे वे अपना रास्ता खुद तये करते है. अगर आश्रम के कुछ गद्दारो को राहुल के तरीके पे तकलीफ है तो आश्रम संचालक राहुल को बुला के face to face साधको के बिच सबके सामने सवाल जवाब भी कर सकते थे जो की नहीं किया गया.

कुछ हक़ीक़त आपके सामने रखता हूँ ऋषि प्रसाद की.
१) पहले ऋषि प्रसाद की ownership महिला उठान ट्रस्ट के पास थी.
२) १९८० से अभी तक जितनी भी ट्रस्ट बानी है, सब का डाटा ऑनलाइन है. महिला उत्थान ट्रस्ट का कही नाम ही नहीं आ रहा है. सवाल यह है की क्या महिला उत्थान ट्रस्ट के नाम पे कोई ट्रस्ट थी की भी नहीं? उद्धरण के लिए इस लिंक पे क्लिक कीजिये. 
यहाँ पे आप पाएंगे दो अलग अलग स्वामी ऋषि प्रसाद के. https://bit.ly/2vzKctO
३) अगर गद्दार वाणी सही है और इसके खिलाफ कुछ केस नहीं है तो फिर इसका नाम किसकी आज्ञा से हटाया गया? और अगर यह गलत है तो बताये की इसने कितने करोड़ो का आश्रम को नुक्सान किया है? उद्धरण के लिए इस लिंक पे क्लिक करे. https://bit.ly/2KsYpxX
४) डॉ.प्रेमजी को भी कभी हटा देते है तो कभी add कर लेते है. उद्धरण के लिए इस लिंक को क्लिक करे. https://bit.ly/2KsYpxX
५) अभी जयादा गहराई में नहीं गया हूँ इस सब के पीछे का राज जानने के लिए. पर जैसे जैसे आगे proof मिलते जायेगा, वैसे वैसे शेयर करता रहूँगा.

ऊपर के तथ्ये के अनुसार, आश्रम वालो ने कभी भी कोई भी काम सही ढंग से legally नहीं करे है. हमेशा setting के चक्कर में रहते है जिसके कारण केस को भी बहुत नुक्सान हुआ है. ऋषि प्रसाद में भी अपनी मर्ज़ी से फेर बदल करते आये है ठीक वैसे ही जैसे ट्रस्टों में, आश्रम की जमीनों में, आश्रम के बैंक कहते में करते आये है अभी तक गलत मंशा के द्वारा की गयी गलती का भुक्तान पूज्य बापूजी को करना पढ़ रहा है.

कुछ गद्दार आश्रमवालो से यह पूछता हूँ की वे सवालो से क्यों भागते रहते है. अगर थोड़ी से भी सचाई है तुममे तो बुलाओ राहुल भाई को, बुलाओ मुख्या संचालको को और बुलाओ बहार के साधक को और आमने सामने १ दिन की चर्चा करलो और उसकी रिकॉर्डिंग करलो. दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा. जगह भी तुम्हारी, समय भी तुम्हारा. बोलो, करने की है हिम्मत?

पर इसके बदले ऋषि प्रसाद जैसे national level की पत्रिका में राहुल भाई और internal matter का छपवाना बिलकुल भी गलत है.

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हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
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Wednesday, August 1, 2018

Whatsapp Message: 1st August

हरिओम, बेईमान, कपटी, गद्दार संचालक को आज्ञा कैसे मिल जाती है? आइये जानते है कैसे! दुष्ट, कपटी, बेईमान, आसुरी वृति वाला भस्मासुर था, फिर भी शिवजी ने वरदान दिए और शिवजी को ही भारी पड़ा. क्या शिवजी सही और गलत नहीं जानते थे? रावण कामी, अहंकारी असुर था पर फिर भी ब्रह्माजी ने रावण की मनोकामना पूर्ण की और उसको इक्छित वरदान दे दिए. क्या ब्रह्मा जी को सही और गलत का पता नहीं था? वैसे ही कंस और हिरण्यकश्यप भी असुर और अहंकारी थे, फिर भी उनकी आराधना पर उनको अपनी इक्छा के हिसाब से वरदान मिला. क्या ब्रह्मा जी और विष्णु जी को सही और गलत का पता नहीं था? अंग्रेज भारत को लुटते थे, धर्मान्तरण करते थे, स्त्रियों पे अत्याचार करते थे, फिर भी वो अंग्रेज देवराह बाबा के दर्शन और आशीर्वाद लेने जाते थे. क्या देवराह बाबा को सही और गलत का पता नहीं था? मौनी बाबा के बारे में आप सभी ने बापूजी के श्री मुख से कई बार सुना होगा. उनको सट्टेबाजो ने कैद करके रखा था और सट्टे के नंबर मौनी बाबा से पूछे जाते थे. सट्टे बाजो के कब्जे से कैसे अपने साधको ने उनको कार में बिठा के सट्टे बाजो से मुक्त करवाया, यह कुछ साधक जानते होंगे. तो क्या मौनी बाबा को सही या गलत का पता नहीं था जो सट्टेबाजो को मदद करते थे? ऐसे कई उद्धरण है और आपके पास भी होंगे. ब्रह्मज्ञानी बापूजी भी शिवजी, ब्रह्मा जी, और विष्णु जी ही है. बापूजी को भी पूरी शृष्टि मात्र स्वप्ना और खेल लगता है और फिर बापूजी को अपना शरीर और आश्रम पे भी मोह नहीं है. बापूजी के आश्रम की सात्विकता को बचाना साधक का परम कर्तव्ये है, बापूजी का नहीं. ऐसे में जब दुष्ट, कपटी, गद्दार और हरामी वृत्ति के संचालक अपनी कपट बुद्धि से गलत मंशा लेके जाते है तो बापूजी ठीक शिवजी, ब्रह्माजी और विष्णु जी की तरह इनकी इक्षा भी पूरी करते है और उनकी इच्छा पे हाँ बोलते है. इसी को यह लोग आज्ञा का हवाला देते है और मुर्ख साधको को और मुर्ख बनाते है. ऐसा भी देखा गया है की जब अच्छे साधक जाते है तो उनकी इच्छा भी पूरी करने के लिए बापूजी हाँ बोलते है जो की गद्दार, कपटी और हरामी वृत्तियों की इच्छा के विपरीत होती है. फिर वे ही हरामी, आश्रम की फ्री की रोटी खाने वाला कपटी, विपरीत आज्ञा लेके आ जाता है और बापूजी की आज्ञा का हवाला देके मुर्ख साधको को और मुर्ख बनाता रहता है. हक़ीक़त यह है की आज की तारिक़ में बापूजी का access ऐसे ही हरामी, कपटी, फ्री की रोटी तोड़ने वालो को ज्यादा है. पर अगर अच्छे साधक और अच्छे आश्रमवासी का भी बापूजी तक सीधा access होता है तो फिर बापूजी इनकी इच्छा भी पूर्ण करेंगे और अच्छे सेवा कार्यो को आज्ञा मिलेगी. बापूजी न जेल में रहना का संकल्प करेंगे और न ही बहार आने का संकल्प करेंगे. हमे बापूजी चाहिए तो साधक को ही कुछ करना पड़ेगा नहीं तो दुष्ट संचालक तो बापूजी को जेल में ही रखेंगे और आश्रम को बेच के खा जायेंगे. और इसकी आज्ञा भी बापूजी से ही लेके आएंगे. फिर मुर्ख साधक कहेंगे की यह भी बापूजी की लीला है और संकल्प, शरबत, ट्विटर और वक्ताओं की भक्ति में लग जायेंगे. http://athishravikanth.blogspot.in/ हरिओम। आतीश रविकांत, बंगलौर सेल एवं व्हाट्सप्प: +91 9663978686 Email: athishravikanth@gmail.com

Saturday, July 28, 2018

Whatsapp Message: 28th July

हरिओम,

बापूजी के सत्संग, कीर्तन, ध्यान और भजन के आगे वक्ताओं की तिनके भर की हैसियत है?

अगर आपके हिसाब से है तो गलती से यह पोस्ट आपतक आ गया है, ignore कीजिये. और अगर नहीं है तो आगे पढ़िए.

पिछले ५ साल से साधको को बापूजी का सत्संग, वो बापूजी की गरजना, वो बापूजी का प्यार, वो बापूजी की आभामंडल, वो अमृतवाणी, वो दिव्य दर्शन, और वो बापूजी का मंच में नाचना आदि से सब वंचित है.* मेरे हिसाब से तो अधिकतर साधक सब भूल गए है यह सब. इसलिए वक्ताओं से अब खुश है.

वो बालक मुर्ख है जिसे प्लास्टिक के आम में मजा आ जाये. पर सियानी माँ उस मुर्ख बालक को असली आम का मज़ा चखा के प्लास्टिक का मोह दूर कराती है. पर वो बालक महामुर्ख है जो असली आम का मजा चख के दुबारा प्लास्टिक के आम के मोह में पड़ जाये.

कुछ ऐसे ही आज साधक की सिथिति है. बापूजी के असली ज्ञान, असली आनंद को, असली दिव्या वाणी को, असली दर्शन को भूल के वक्ताओं के नखलि रस में मजा आ रहा है महामुर्ख और मन्दमति साधको को.

वक्ताओं को sleeper class में सफर करा के देखो तो पता चलेगा इनके अहंकार और द्वेष का.
वक्ताओं को बिना दक्षिणा के वापस भेजदो तब पता चलेगा इनके पैसो के प्रति मोह और लोभ का.
वक्ताओं को कहे की आप कुछ ज्ञान न दे सत्संग पंडाल में बल्कि प्रोजेक्टर में बापूजी का सत्संग चलाया जाये तब पता चलेगा आपको वक्ताओं के क्रोध का.
जो काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से ग्रस्त है, ऐसो की वाणी को आप सत्संग कहते है?

सत्संग तो सिर्फ पूज्य गुरुदेव कर सकते है. बाकी ने तो कमाने का धंदा खोलके रखा है.

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हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
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Friday, July 27, 2018

Whatsapp Message: 27th July

हरिओम,

आज गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर में पूज्य गुरुदेव की अमृतवाणी सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो सकता है क्या?

पूज्य गुरुदेव को उम्र कैद की सजा दिलवाने के बाद साधको का आक्रोश काम करने के लिए, अपनी जान बचाने के लिए और अपनी रोजी रोटी बरक़रार करने के लिए जोधपुर जेल से live सत्संग करवाया गया था.

क्या आज गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर ५ मिनट का लाइव ऑडियो सत्संग आश्रम वाले करवा सकते है?

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हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
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