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Friday, May 18, 2018

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हरिओम,

पूज्य गुरुदेव को बहार लाने के लिए प्रयास करे या तो बिना गुरुदेव के जीने के अभ्यास करे बात कड़वी है पर सच्ची है.
कुछ कड़वी सचाई जो आज सबके साथ शेयर करना चाहूंगा.

हमारे पूज्य गुरुदेव के शरीर की उम्र ८० से ज्यादा हो चुकी है. आज कल का हवामान और खाने में मिलाया गया केमिकल के अनुसार इस कलयुग के हिसाब से पूज्य गुरुदेव का शरीर और ५-१५ साल मन लीजिये. परन्तु जिस प्रकार जेल का वातावरण और खानपान है, उसके हिसाब से ज्यादा कहना ठीक नहीं है.

जिस तरीके से केस चल रहा है, उसके हिसाब से अगले ५ साल तक भी बापूजी हमारे बिच नहीं आएंगे. अगर आज की तारिक मई १८ २०१८ से भी अच्छे वकील केस सँभालते है तो भी काम से कम १८-३० महीना लगेगा कुछ पॉजिटिव रिजल्ट आने में. नहीं तो जिस हिसाब से अपने जोधपुर की लीगल टीम केस को आगे बड़ा रही है, उस हिसाब से तो हमे हमारे पूज्य गुरुदेव को भूल ही जाना चाहिए. ध्यान रहे लीगल टीम के साथ पूरा का पूरा अहमदाबाद आश्रम का मैनेजमेंट भी साथ है. इन सब के मन में बस एक ही इच्छा है की कैसे भी करके हमारे गुरजी अंदर ही रहे और हम हमारी गद्दी संभल ले या तो आश्रम बेच के अपनी जिंदगी सेट करले.

पूज्य गुरुदेव को आजीवन कारावास का पूरा प्लान हो चूका है. ३-४ साल में अगर पूज्य गुरुदेव को जोधपुर जेल से रहत मिलती भी है तो अहमदाबाद का केस त्यार खड़ा है. जब जोधपुर का केस ८-१० साल चल सकता है तो अहमदाबाद केस कितने साल चल सकता है? इस का आप खुद अंदाजा लागले क्यूंकि आप समझदार है. इसका सीधा मतलब एहि है की हमारे पूज्य गुरुदेव के शरीर को शांत होने तक यह जोधपुर लीगल टीम और अहमदाबाद के मैनेजमेंट वाले लीगल, कोर्ट और कचेरी के चक्कर में सब ख़तम कर देंगे.

मेरा सवाल आप सब से यह है की
बिना सदगुरुदेव के वक्ताओं के वक्तत्व का क्या महत्व ?
बिना सदगुरुदेव के आश्रमों का क्या करेंगे ?
बिना सदगुरुदेव के आश्रम के प्रोडक्ट का क्या महत्व ?
बिना सदगुरुदेव के क्या मिल जायेगा संचालको के चाटुकार बनके?
बिना सदगुरुदेव के क्या करेंगे हम सब.?
बिना सदगुरुदेव के कौन उठाएगा हमे ऊपर ?
बिना सदगुरुदेव के क्या करेंगे जोधपुर लीगल टीम की भक्ति का?
बिना सदगुरुदेव के क्या करेंगे ऋषि प्रसाद सेवा का ?

इतिहास गवाह है की ब्रह्मज्ञानी को जेल में रखके ज़हर दे कर मर दिया गया, इतिहास गवाह है की सत्ता के लोगो ने स्वार्थी और निक्कमे शिष्यों का सहारा लेके महापुरुषों को जेल में ही महापुरुषों का शरीर शांत करा दिया गया.

दुःख और डर के साथ कहना पढ़ रहा है की वही इतिहास दुबारा दोहराया जा रहा है.

सभी का focus पूज्य गुरुदेव से हटा के वक्ताओं के प्रोग्राम पे लगाया जा रहा है,
सभी का focus पूज्य गुरुदेव से हटा के दूसरे प्रोग्राम पे लगाया जा रहा है,
सभी का focus पूज्य गुरुदेव से हटा के शरबत वितरण और भंडारा जैसे सेवा पे लगाया जा रहा है

बिना सदगुरुदेव के क्या महतत्व इन सब का?

पूज्य बापूजी को जेल से जितना जल्दी बहार ला सकें, उतना हमारे लिए अच्छा है. नहीं तो गुरूजी तो ज्ञानी है, उन्हें शिष्यों से मोह नहीं परन्तु हम तो बापूजी से है और हमे बापूजी की ही जरुरत है. हमारी आध्यात्मिक स्थिति भी डॉ.प्रेम जी तरह नहीं है की हम गुरूजी को खोने के बाद भी अध्यतम मस्ती में दुबे रहे. बापूजी के अलावा और कोई गुरु का स्थान नहीं ले सकता हमारे जीवन में.

इसीलिए कह रहा हु की बिना गुरुदेव के जीने का अभ्यास करलो या गुरुदेव को बहार लेन के लिए कुछ करलो. बिच का रास्ता कुछ नहीं है.

http://athishravikanth.blogspot.in/

हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
सेल एवं व्हाट्सप्प: +91 9663978686
Email: athishravikanth@gmail.com

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