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Saturday, July 28, 2018

Whatsapp Message: 28th July

हरिओम,

बापूजी के सत्संग, कीर्तन, ध्यान और भजन के आगे वक्ताओं की तिनके भर की हैसियत है?

अगर आपके हिसाब से है तो गलती से यह पोस्ट आपतक आ गया है, ignore कीजिये. और अगर नहीं है तो आगे पढ़िए.

पिछले ५ साल से साधको को बापूजी का सत्संग, वो बापूजी की गरजना, वो बापूजी का प्यार, वो बापूजी की आभामंडल, वो अमृतवाणी, वो दिव्य दर्शन, और वो बापूजी का मंच में नाचना आदि से सब वंचित है.* मेरे हिसाब से तो अधिकतर साधक सब भूल गए है यह सब. इसलिए वक्ताओं से अब खुश है.

वो बालक मुर्ख है जिसे प्लास्टिक के आम में मजा आ जाये. पर सियानी माँ उस मुर्ख बालक को असली आम का मज़ा चखा के प्लास्टिक का मोह दूर कराती है. पर वो बालक महामुर्ख है जो असली आम का मजा चख के दुबारा प्लास्टिक के आम के मोह में पड़ जाये.

कुछ ऐसे ही आज साधक की सिथिति है. बापूजी के असली ज्ञान, असली आनंद को, असली दिव्या वाणी को, असली दर्शन को भूल के वक्ताओं के नखलि रस में मजा आ रहा है महामुर्ख और मन्दमति साधको को.

वक्ताओं को sleeper class में सफर करा के देखो तो पता चलेगा इनके अहंकार और द्वेष का.
वक्ताओं को बिना दक्षिणा के वापस भेजदो तब पता चलेगा इनके पैसो के प्रति मोह और लोभ का.
वक्ताओं को कहे की आप कुछ ज्ञान न दे सत्संग पंडाल में बल्कि प्रोजेक्टर में बापूजी का सत्संग चलाया जाये तब पता चलेगा आपको वक्ताओं के क्रोध का.
जो काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से ग्रस्त है, ऐसो की वाणी को आप सत्संग कहते है?

सत्संग तो सिर्फ पूज्य गुरुदेव कर सकते है. बाकी ने तो कमाने का धंदा खोलके रखा है.

http://athishravikanth.blogspot.in/

हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
सेल एवं व्हाट्सप्प: +91 9663978686
Email: athishravikanth@gmail.com

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