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Tuesday, July 24, 2018

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हरिओम,

"एक और नाकामी" मुफत की घी की रोटी और देसी गाये की खीर खाने वालो की.

रविवार २२ जुलाई २०१८ को असामजिक तत्वों ने बड़ौत आश्रम की बाउंड्री गिरा दी. खैर यह आश्चर्य नहीं है, आश्चर्य यह है की मुफत की घी को रोटी तोड़ने वाले और मुफत की देसी गाये की खीर खाने वाले अहमदाबाद आश्रम में बैठे संचालको ने इसको बचने के लिए कुछ भी नहीं किया.

अहमदाबाद के अखिल भारतीय योग वेदांत सेवा समिति में बैठे संसारी की जिम्मेदारी थी की जिस आश्रम पर आश्रमवासी की कमी हो तो वहां पे जरुरत के हिसाब से आश्रमवासी को appoint करे. परन्तु पैसा कमाने में, शादी करने में और बच्चे पैदा करने में इतने बिजी हो गये की इनको ध्यान ही नहीं आया की बड़ौत आश्रम को बचाना भी है. यह आश्रम गुरूजी का है. इनके बाप का नहीं.

वही दूसरी तरफ अहमदाबाद आश्रम के लीगल टीम के मेंबर जिनमे एक भी वकील नहीं है, इनकी जिम्मेदारी बनती थी की सभी आश्रम के लीगल मैटर को देखे और संभाले. पर यह लोग फ़िलहाल मुफत की रोटी और देसी गाये की खीर खाके अहमदाबाद और जोधपुर में बापूजी का केस बिगड़ने में व्यस्त है ताकि पूरा आश्रम हड़पा जा सके.

जब आश्रम से कोई भी आश्रमवासी appoint नहीं हुआ तो बड़ौत आश्रम की देखभाल अपनी योग्यता के अनुसार समिति के २-४ भाई करते थे. अहमदाबाद आश्रम और करोल बाग़ आश्रम को कई बार इस विषय पर बताया गया पर करोल बाग़ और अहमदाबाद आश्रमवाले वक्ता का प्रोग्राम सेट करने में बिजी थे.

इस boundary को दुबारा बनाने का खर्च मात्र २.५ लाख से ३ लाख तक का है. इसको आश्रम वापस बनाने में आनाकानी कर रहा है. धिक्कार है इनको जो करोड़ो का घोटाला करके हजम करके बैठे है पर गुरूजी के आश्रम की एक boundary बनाने नहीं हो रहा है.

दूसरी तरफ वक्ता द्वारा साधको को बेवकूफ बनाने का धंदा जोर शोर से चालू हो गया है.

बड़ौत आश्रम की तोड़ी गयी boundary की photo साथ में शेयर कर रहा हु.

http://athishravikanth.blogspot.in/

हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
सेल एवं व्हाट्सप्प: +91 9663978686
Email: athishravikanth@gmail.com

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