Pages

Wednesday, August 1, 2018

Whatsapp Message: 1st August

हरिओम, बेईमान, कपटी, गद्दार संचालक को आज्ञा कैसे मिल जाती है? आइये जानते है कैसे! दुष्ट, कपटी, बेईमान, आसुरी वृति वाला भस्मासुर था, फिर भी शिवजी ने वरदान दिए और शिवजी को ही भारी पड़ा. क्या शिवजी सही और गलत नहीं जानते थे? रावण कामी, अहंकारी असुर था पर फिर भी ब्रह्माजी ने रावण की मनोकामना पूर्ण की और उसको इक्छित वरदान दे दिए. क्या ब्रह्मा जी को सही और गलत का पता नहीं था? वैसे ही कंस और हिरण्यकश्यप भी असुर और अहंकारी थे, फिर भी उनकी आराधना पर उनको अपनी इक्छा के हिसाब से वरदान मिला. क्या ब्रह्मा जी और विष्णु जी को सही और गलत का पता नहीं था? अंग्रेज भारत को लुटते थे, धर्मान्तरण करते थे, स्त्रियों पे अत्याचार करते थे, फिर भी वो अंग्रेज देवराह बाबा के दर्शन और आशीर्वाद लेने जाते थे. क्या देवराह बाबा को सही और गलत का पता नहीं था? मौनी बाबा के बारे में आप सभी ने बापूजी के श्री मुख से कई बार सुना होगा. उनको सट्टेबाजो ने कैद करके रखा था और सट्टे के नंबर मौनी बाबा से पूछे जाते थे. सट्टे बाजो के कब्जे से कैसे अपने साधको ने उनको कार में बिठा के सट्टे बाजो से मुक्त करवाया, यह कुछ साधक जानते होंगे. तो क्या मौनी बाबा को सही या गलत का पता नहीं था जो सट्टेबाजो को मदद करते थे? ऐसे कई उद्धरण है और आपके पास भी होंगे. ब्रह्मज्ञानी बापूजी भी शिवजी, ब्रह्मा जी, और विष्णु जी ही है. बापूजी को भी पूरी शृष्टि मात्र स्वप्ना और खेल लगता है और फिर बापूजी को अपना शरीर और आश्रम पे भी मोह नहीं है. बापूजी के आश्रम की सात्विकता को बचाना साधक का परम कर्तव्ये है, बापूजी का नहीं. ऐसे में जब दुष्ट, कपटी, गद्दार और हरामी वृत्ति के संचालक अपनी कपट बुद्धि से गलत मंशा लेके जाते है तो बापूजी ठीक शिवजी, ब्रह्माजी और विष्णु जी की तरह इनकी इक्षा भी पूरी करते है और उनकी इच्छा पे हाँ बोलते है. इसी को यह लोग आज्ञा का हवाला देते है और मुर्ख साधको को और मुर्ख बनाते है. ऐसा भी देखा गया है की जब अच्छे साधक जाते है तो उनकी इच्छा भी पूरी करने के लिए बापूजी हाँ बोलते है जो की गद्दार, कपटी और हरामी वृत्तियों की इच्छा के विपरीत होती है. फिर वे ही हरामी, आश्रम की फ्री की रोटी खाने वाला कपटी, विपरीत आज्ञा लेके आ जाता है और बापूजी की आज्ञा का हवाला देके मुर्ख साधको को और मुर्ख बनाता रहता है. हक़ीक़त यह है की आज की तारिक़ में बापूजी का access ऐसे ही हरामी, कपटी, फ्री की रोटी तोड़ने वालो को ज्यादा है. पर अगर अच्छे साधक और अच्छे आश्रमवासी का भी बापूजी तक सीधा access होता है तो फिर बापूजी इनकी इच्छा भी पूर्ण करेंगे और अच्छे सेवा कार्यो को आज्ञा मिलेगी. बापूजी न जेल में रहना का संकल्प करेंगे और न ही बहार आने का संकल्प करेंगे. हमे बापूजी चाहिए तो साधक को ही कुछ करना पड़ेगा नहीं तो दुष्ट संचालक तो बापूजी को जेल में ही रखेंगे और आश्रम को बेच के खा जायेंगे. और इसकी आज्ञा भी बापूजी से ही लेके आएंगे. फिर मुर्ख साधक कहेंगे की यह भी बापूजी की लीला है और संकल्प, शरबत, ट्विटर और वक्ताओं की भक्ति में लग जायेंगे. http://athishravikanth.blogspot.in/ हरिओम। आतीश रविकांत, बंगलौर सेल एवं व्हाट्सप्प: +91 9663978686 Email: athishravikanth@gmail.com

No comments:

Post a Comment