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Saturday, August 4, 2018

Whatsapp Message: 4th Aug

हरिओम,

ऋषि प्रसाद में राहुल जोशी का नाम उल्लेख करने का कारण जानने की कोशिश करते है!

ऋषि प्रसाद पत्रिका का स्तर बहुत ऊँचा था और है, रहेगा की नहीं, पता नहीं.  ऋषि प्रसाद की सेवा करने वाले सौभाग्यशाली साधको को पता होगा की ऋषि प्रसाद के मेंबर ज्यादातर वे है जो साधक नहीं है.

ऋषि प्रसाद पत्रिका के माध्यम से बहुत non -sadhak को नाना प्रकार के लाभ हुए है और इसी कारण वे पूज्य बापूजी से भी जुड़े है.

अगर कुछ issue को प्रकाशित ही करना था तो national issue ले लेते jaise मोदी के खिलाफ, सीताराम येचुरी के खिलाफ, ईसाई पॉप के खिलाफ या और भी कुछ national level के issues.

राहुल भाई, आप, में और हम सब की तरह एक साधक है और उनके मन में भी पीड़ा है और जोश भी है कुछ करने के लिए. अगर राहुल भाई का तरीका पसंद नहीं आया तो इनसे हाल ही में हुई संकल्प सभा में चर्चा कर लेना था. राहुल भाई ने कभी national issue नहीं उठाया है. हमेशा internal issue उठाया है. Internal issues को national level की पत्रिका में छपने के पीछे आश्रम के गद्दार संचालको की घबराहट और immaturity दिख रही है.

राहुल सिर्फ मुद्दे के बातो पे सवाल ही तो पूछते है, कोई murder तो नहीं कर रहे है और जवाब न मिलने पे वे अपना रास्ता खुद तये करते है. अगर आश्रम के कुछ गद्दारो को राहुल के तरीके पे तकलीफ है तो आश्रम संचालक राहुल को बुला के face to face साधको के बिच सबके सामने सवाल जवाब भी कर सकते थे जो की नहीं किया गया.

कुछ हक़ीक़त आपके सामने रखता हूँ ऋषि प्रसाद की.
१) पहले ऋषि प्रसाद की ownership महिला उठान ट्रस्ट के पास थी.
२) १९८० से अभी तक जितनी भी ट्रस्ट बानी है, सब का डाटा ऑनलाइन है. महिला उत्थान ट्रस्ट का कही नाम ही नहीं आ रहा है. सवाल यह है की क्या महिला उत्थान ट्रस्ट के नाम पे कोई ट्रस्ट थी की भी नहीं? उद्धरण के लिए इस लिंक पे क्लिक कीजिये. 
यहाँ पे आप पाएंगे दो अलग अलग स्वामी ऋषि प्रसाद के. https://bit.ly/2vzKctO
३) अगर गद्दार वाणी सही है और इसके खिलाफ कुछ केस नहीं है तो फिर इसका नाम किसकी आज्ञा से हटाया गया? और अगर यह गलत है तो बताये की इसने कितने करोड़ो का आश्रम को नुक्सान किया है? उद्धरण के लिए इस लिंक पे क्लिक करे. https://bit.ly/2KsYpxX
४) डॉ.प्रेमजी को भी कभी हटा देते है तो कभी add कर लेते है. उद्धरण के लिए इस लिंक को क्लिक करे. https://bit.ly/2KsYpxX
५) अभी जयादा गहराई में नहीं गया हूँ इस सब के पीछे का राज जानने के लिए. पर जैसे जैसे आगे proof मिलते जायेगा, वैसे वैसे शेयर करता रहूँगा.

ऊपर के तथ्ये के अनुसार, आश्रम वालो ने कभी भी कोई भी काम सही ढंग से legally नहीं करे है. हमेशा setting के चक्कर में रहते है जिसके कारण केस को भी बहुत नुक्सान हुआ है. ऋषि प्रसाद में भी अपनी मर्ज़ी से फेर बदल करते आये है ठीक वैसे ही जैसे ट्रस्टों में, आश्रम की जमीनों में, आश्रम के बैंक कहते में करते आये है अभी तक गलत मंशा के द्वारा की गयी गलती का भुक्तान पूज्य बापूजी को करना पढ़ रहा है.

कुछ गद्दार आश्रमवालो से यह पूछता हूँ की वे सवालो से क्यों भागते रहते है. अगर थोड़ी से भी सचाई है तुममे तो बुलाओ राहुल भाई को, बुलाओ मुख्या संचालको को और बुलाओ बहार के साधक को और आमने सामने १ दिन की चर्चा करलो और उसकी रिकॉर्डिंग करलो. दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा. जगह भी तुम्हारी, समय भी तुम्हारा. बोलो, करने की है हिम्मत?

पर इसके बदले ऋषि प्रसाद जैसे national level की पत्रिका में राहुल भाई और internal matter का छपवाना बिलकुल भी गलत है.

http://athishravikanth.blogspot.in/

हरिओम।
आतीश रविकांत, बंगलौर
सेल एवं व्हाट्सप्प: +91 9663978686
Email: athishravikanth@gmail.com

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